पांच देशों का सफर, 50+ देशों की यादें और सुरों का जुनून: Diza Saxena की कहानी

|
पांच देशों का सफर, 50+ देशों की यादें और सुरों का जुनून: Diza Saxena की कहानी

Mumbai (Anil Bedag): कुछ सपने नौकरी की सुरक्षित कुर्सी से बड़े होते हैं और कुछ आवाज़ें दिल की गहराइयों से निकलकर अपनी राह खुद बनाती हैं। दिज़ा सक्सेना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। LSE से ग्रेजुएशन के बाद स्पेन में कॉर्पोरेट करियर शुरू करने वाली 22 वर्षीय दिज़ा ने अचानक अपने जीवन की दिशा बदल दी और हिंदुस्तानी संगीत को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया।

आठ वर्षों की शास्त्रीय संगीत ट्रेनिंग ने उन्हें वह आधार दिया, जिस पर अब वह अपनी अलग पहचान गढ़ रही हैं। मुंबई में ‘बैठो ना’ शाम के जरिए दिज़ा ने सेमी-क्लासिकल, ग़ज़ल, उर्दू शायरी और मॉडर्न म्यूजिक का ऐसा मेल पेश किया, जिसमें परंपरा भी थी और Gen Z की ताजगी भी।

‘लग जा गले’, ‘इन आँखों की मस्ती’, जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि और ‘छाप तिलक’ जैसी प्रस्तुतियों ने संगीतप्रेमियों का दिल जीत लिया।

दिज़ा पांच देशों में रह चुकी हैं और 50 से अधिक देशों की यात्रा कर चुकी हैं। दुबई की घरेलू महफ़िलों से मुंबई के मंच तक पहुंची दिज़ा अब भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि विरासत को संभालते हुए उसे आज की जुबान में सुनाना ही संगीत की खूबसूरती है।

Tags

Share this story

featured

Trending