स्कैम, साइबर ठगी और डीपफेक का डर, इन भारतीय सीरीज़ में छिपे हैं डिजिटल दुनिया के काले सच
Mumbai: डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उसके खतरे भी उतने ही गंभीर हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी फोन कॉल, आर्थिक घोटालों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डिजिटल अरेस्ट से लेकर डीपफेक वीडियो तक, तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी की जमा-पूंजी ही नहीं, बल्कि उसकी निजता और पहचान को भी खतरे में डाल सकता है। ऐसे में भारतीय फिल्मों और वेब सीरीज़ ने इन खतरों को दिलचस्प कहानियों के जरिए पर्दे पर उतारा है।
‘जामताड़ा: सबका नंबर आएगा’ फोन कॉल के जरिए लोगों को ठगने और उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने के तरीकों को उजागर करती है। वहीं, ‘सीटीआरएल’ एआई, डिजिटल निगरानी और निजी जानकारी के दुरुपयोग की भयावह संभावनाओं से रूबरू कराती है।
आर्थिक धोखाधड़ी की दुनिया समझने के लिए ‘स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी’ शेयर बाजार के चर्चित घोटाले की परतें खोलती है, जबकि ‘स्कैम 2003: द तेलगी स्टोरी’ नकली स्टांप पेपर घोटाले के जरिए व्यवस्था की कमजोरियों और संगठित धोखाधड़ी को सामने लाती है।
वहीं, ‘बैड बॉय बिलियनेयर्स: इंडिया’ बड़े कारोबारी साम्राज्यों, उनसे जुड़े विवादों और जवाबदेही के सवालों की पड़ताल करती है।
ये पांचों प्रस्तुतियां अलग-अलग दौर और परिस्थितियों की कहानियां कहती हैं, लेकिन इनका संदेश एक है—तकनीक हो या आर्थिक व्यवस्था, आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। मनोरंजन के साथ जागरूकता का संदेश देने वाली ये कहानियां दर्शकों को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने की अहमियत भी समझाती हैं।

