मुंबई में बढ़ता कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा: 85% लोग डॉक्टर की बजाय खुद लेते हैं दवा, सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

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मुंबई में बढ़ता कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा: 85% लोग डॉक्टर की बजाय खुद लेते हैं दवा, सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

Mumbai (Anil Bedag): कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर सामने आए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। मर्क स्पेशालिटीज प्रा. लि. द्वारा समर्थित “लाइफस्टाइल एवं डाइजेस्टिव हेल्थ अवेयरनेस सर्वे” के अनुसार, भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान के चलते पाचन संबंधी समस्याएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता अभी भी बेहद कम है।

मुंबई में किए गए विश्लेषण में यह सामने आया कि केवल 18.9% लोग ही मल में खून या मल त्याग की आदतों में बदलाव को कैंसर के संकेत के रूप में पहचानते हैं। वहीं 85% से अधिक लोग डॉक्टर से परामर्श लेने के बजाय स्वयं दवा लेना पसंद करते हैं। डॉ. ज्योति बाजपेयी ने कहा, “कोलोरेक्टल कैंसर अक्सर छोटे पॉलिप्स से शुरू होता है, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। मल में खून, पेट दर्द या वजन कम होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”

डॉ. मुबारकुन्निसा टोन्से के अनुसार, “मुंबई में लोग गंभीर लक्षणों में भी खुद दवा लेते हैं, जो स्थिति को और जटिल बना सकता है।” वहीं डॉ. दर्शित शाह ने चेतावनी दी, “प्रोसेस्ड फूड, व्यायाम की कमी और तंबाकू सेवन इस कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।” विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, जागरूकता और सही जीवनशैली अपनाकर इस बढ़ते खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।

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