क्या नृत्य गुरुओं को चश्मा नहीं लगता है?

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क्या नृत्य गुरुओं को चश्मा नहीं लगता है?
अक्सर देखा गया है कि जो लोग वर्षों से शास्त्रीय नृत्य (जैसे कथक, भरतनाट्यम या ओडिसी) सिखा रहे हैं, उनके हाव-भाव में पुरुषों जैसी कठोरता की जगह महिलाओं जैसी कोमलता और 'लास्य भाव' आ जाता है। यह कोई जेंडर का बदलाव नहीं है, बल्कि कला का मांसपेशियों पर पड़ने वाला गहरा प्रभाव है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका उनकी आँखों की सेहत पर भी जादुई असर पड़ता है? भारतीय नृत्य विधाओं में 'दृष्टि भेद' (जैसे 'सॉमा', 'आलोकितम', 'साची') के तहत पुतलियों को तेजी से घुमाने, दूर और पास फोकस करने तथा पलकें झपकाने का कठोर अभ्यास कराया जाता है।
चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से यह आँखों की सबसे बेहतरीन योग क्रिया (जैसे त्राटक क्रिया) है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation): लगातार आँखों की एक्सरसाइज करने से आँखों के आस-पास की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Microvessels) में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर खून का बहाव तेज हो जाता है। इससे आँखों की थकावट (Eye Strain) और सूखापन (Dry Eyes) पूरी तरह खत्म हो जाता है।
इन बीमारियों से बचते हैं नृत्य शिक्षक: बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और सिलियरी मांसपेशियों (Ciliary Muscles) के मजबूत होने के कारण नृत्य शिक्षकों में ग्लूकोमा (काला मोतिया - Glaucoma) जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बहुत कम हो जाता है, क्योंकि यह कसरत आँखों के अंदरूनी दबाव (Intraocular Pressure) को नियंत्रित रखती है। इसके अलावा वे उम्र के साथ होने वाले मोतियाबिंद (Cataract) और रेटिना की कमजोरी से भी बचे रहते हैं।
चश्मा न लगने का वैज्ञानिक सच: अपनी आँखों को लगातार 'फोकस शिफ्ट' करने की ट्रेनिंग देते हैं, इसलिए उनकी पास और दूर देखने की मांसपेशियां कभी कमजोर नहीं पड़तीं। यही वजह है कि बढ़ती उम्र में भी इन्हें बहुत देर से या न के बराबर चश्मा लगता है।
क्या कहता है स्टैटिस्टिकल डेटा (Statistical Data)?
ओफ्थैल्मोलॉजी और योग-नेत्र विज्ञान के विभिन्न शोधों के अनुसार: ग्लूकोमा का खतरा 40% तक कम: नियमित रूप से आँखों और शरीर का व्यायाम करने वाले लोगों में सामान्य निष्क्रिय लोगों के मुकाबले ग्लूकोमा होने का जोखिम 40% से अधिक घट जाता है!
आँखों के दबाव में कमी: कस्टमाइज्ड ऑक्युलर एक्सरसाइज (Ocular Exercises) करने से आँखों का इंट्राओकुलर प्रेशर (IOP) तुरंत नियंत्रित होता है, जिससे ऑप्टिक नर्व हमेशा सुरक्षित रहती है।
कम्यूटर विज़न सिंड्रोम से बचाव: जहाँ आज 80% वर्किंग लोग स्क्रीन टाइम के कारण डिजिटल आई स्ट्रेन से जूझ रहे हैं, वहीं हर दिन मात्र 10 मिनट दृष्टि-अभ्यास करने वाले नृत्य गुरुओं में यह समस्या 0% से 5% तक ही पाई जाती है। 
 
डॉ सुमित्रा अग्रवाल आर्टिफीसियल ऑय को कोलकाता,
यूट्यूब आर्टिफीसियल ऑय को कॉल 8820606896

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