UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 महीने में होंगे चुनाव, बने रहेंगे प्रधान प्रशासक

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UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 महीने में होंगे चुनाव, बने रहेंगे प्रधान प्रशासक

Prayagraj: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 3 माह में पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. इस बीच कोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय को सही ठहराते हुए उनको प्रशासक के तौर पर काम करते रहने की अनुमति दी है.

आज कई याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ में कई याचिकाएं दाखिल की गई थी. कोर्ट ने इस सभी याचिकाओं को एक साथ संबद्ध करते हुए सुनवाई की. न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया. राज्य सरकार की ओर से परिसीमन का हवाला देकर चुनाव टालने की दलील दी गई.

याचिका में यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12(3-ए) का हवाला देकर चुनाव टालने और प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति देने के राज्य सरकार के 25 व 26 मई के आदेशों को चुनौती दी गई है. कहा गया कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल के मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही इस धारा को संविधान के अनुच्छेद 243ई और 243के का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक करार दे चुकी है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और 10 जून को मतदाता सूची भी प्रकाशित की जा चुकी है लेकिन राज्य सरकार द्वारा जरूरी व्यवस्थाएं न मिलने के कारण चुनाव कराने में बाधा आ रही है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को सही माना. अदालत का कहना था कि ओबीसी कमीशन अपना काम करता रहेगा. फिलहाल 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा. कोर्ट ने 3 माह में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का निर्देश दिया है.

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